कूच बिहार ट्राॅफी के किस मैच में खेले त्रिवेश, क्यों नहीं बोर्ड भेज रहा है पैसा ?

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कानपुर : उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) पर बीसीसीआई से मिलने वाली अवार्ड मनी न देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में अभी तक यूपीसीए से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। मसलन किस-किस मैच में त्रिवेश यादव को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया गया। उसने यूपी को कितने मैचों में रिप्रजेंट किया ? और बोर्ड पिछले तीन सालों से क्यों नहीं पैसा भेज रहा है ? इसका गुनहगार कौन है ?
सूत्रों की मानें तो जब यह खिलाड़ी चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) दीपक शर्मा से कूच बिहार ट्राॅफी का सर्टिफिकेट लेने यूपीसीए कार्यालय गया तो उसे तीन घंटे तक बाहर इंतजार करवाया गया। दरअसल अक्सर यूपीसीए पदाधिकारियों का खिलाड़ियों के प्रति रूखा व्यवहार भी अभिभावकों के आक्रोश का कारण बन जाता है।
इस सीजन के रिकॉर्ड के मुताबिक त्रिवेश यादव को कूच बिहार ट्राॅफी के एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं दिया गया। यदि रिकॉर्ड सही हैं तो यूपीसीए पदाधिकारियों पर एफआईआर क्यों हुई, जाहिर है इस खिलाड़ी के मामले में कुछ न कुछ तो गलत हुआ होगा।
बता दें की यूपीसीए की टीमों में अक्सर ऐसे खिलाड़ियों को भी रख लिया जाता है जिन्हें न तो चयनकर्ताओं ने चुना होता है और न ही वे कैम्प का हिस्सा होते हैं। ऐसे में जैक से आए खिलाड़ी सिर्फ टूरिस्ट ही बनकर रह जाते हैं। इनमें से अधिकतर को तो टीए-डीए भी यूपीसीए से नहीं मिलता। क्रिकेट की दीवानगी इस हद तक है कि ऐसे घुमंतू खिलाड़ियों का खर्च उनके अभिभावक ही उठाते हैं।
अब ये खिलाड़ी क्यों रखे जाते हैं, इससे यूपी क्रिकेट को फायदा होता है या इनको टीम के साथ लटकाने वालों को, यह तो यूपीसीए ही बेहतर बता सकता है। खिलाड़ियों की जम्बो सूची में 15 के बाद शामिल ज्यादातर खिलाड़ी सिफारिशी ही होते हैं।
जहां तक त्रिवेश का मामला है तो यदि उसे 15 की टीम में शामिल किया गया था तो नियमतः बीसीसीआई की अवार्ड मनी पर उसका भी हक बनता है। कौन कितने मैच खेला उसी अनुपात में उसको उसके हक की राशि दी जाती है। यह अलग बात है कि पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच न खेल पाने वाले खिलाड़ियों को प्लेइंग इलेवन में शामिल खिलाड़ियों से परसंटेज में कम पैसा मिलता है पर मिलता है।

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सूत्रों ने यह भी पुष्टि की है कि पिछले तीन सालों से बीसीसीआई ने यूपीसीए को पैसा नहीं भेजा है। इसकी वजह भी यूपीसीए की लचर कार्यप्रणाली ही है। सूत्रों पर यकीन करें तो स्टेट एसोसिएशन की ओर से बीसीसीआई को जो एन्वाॅयस भरकर भेजी जाती है, वह न भेजे जाने की वजह से ही दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड यूपीसीए को पैसा जारी नहीं कर रहा है। पिछले छह महीनों में यूपीसीए की चयन प्रक्रिया में सुधार देखने को मिला था, इसी का परिणाम रहा कि पिछले सत्र की तुलना में इस बार सुधरा प्रदर्शन हुआ। लेकिन यह मामला ने एक बार फिर संकेत कर रहा है कि कहीं न कहीं अभी भी गड़बड़ी है।

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