एफ1 इन स्कूल्स इंडिया के राष्ट्रीय फाइनल में दिखा विद्यार्थियों का कौशल

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गुरुग्राम : विज्ञान, तकनीक और गणित की जुगलबंदी और स्कूली छात्रों का जबरदस्त कौशल शनिवार को गुरूग्राम स्थित एम्बियांस मॉल में बखूबी देखने को मिला। मौका था एफ1 इन स्कूल्स एवम् टाइम ऑफ स्पोर्ट्स द्वारा आयोजित एफ1 इन स्कूल्स के राष्ट्रीय फाइनल का। इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 45 से अधिक स्कूलों के 700 से अधिक छात्रों ने शिरकत की और स्कूलों में फामूर्ला 1 के व्यापक अंदाज का अनुभव किया।

मॉल में बनाया गया लगभग 25 मीटर एफ1 इन स्कूल ट्रेक मॉल में आये लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र था। अपने आप में अलग अनुभव प्रदान करते हुए इस प्रतियोगिता के प्रति लोगों की उत्सुकता बहुत जबरदस्त थी और उन्होंने प्रतिभागियों से बातचीत करते हुए जानकारी प्राप्त भी की।

लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और इस वर्ष सिंगापुर में होने वाले एफ1 इन स्कूल्स वल्र्ड फाइनल में जगह बनाने हेतु शुभकामनाएं दी। एफ1 इन स्कूल्स स्कूली बच्चों (आयु वर्ग 9-19) के एक अंतर्राष्ट्रीय स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) प्रतियोगिता है, जिसमें 3-6 सदस्य छात्र समूह कैड/कैम डिजाइन टूल का उपयोग करते हुए आधिकारिक एफ 1 मॉडल ब्लॉक के आधार पर लघु कार का निर्माण करते हैं।

पहली ही बार इस प्रतियोगिता को भारत लाने और अपनी ही तरह की तकनीकी प्रतियोगिता के विषय में टाईम्स ऑफ स्पोर्टस के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी व संस्थापक यशराज सिंह ने कहा कि भारत में यह चुनौति लाना अपने आप में एक बहुत व्यापक अवसर है जिससे कि सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में युवा साइंटीफिक दिमागों की खोज करने व पहचानने के अवसर खुलेंगे।

प्रतियोगिता के लिए मॉल में एफ1 इन स्कूल्स शोकेस, डिजाइन व मेक क्षेत्र था, जहां विद्यार्थियों ने लाइव डेमोनस्ट्रेशन प्रस्तुत करते हुए आगंतुकों को दशार्या कि किस तरह से मिनीएचर कार को बनाया, डिजाइन एवम् टेस्ट किया जाता है।

एफ1 इन स्कूल्स वल्र्ड में दुनिया भर में 44 से अधिक देशों में शामिल है, और हर साल 20 लाख से अधिक छात्र प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। यह पहली बार है कि प्रतियोगिता भारत में आयोजित की जा रही है और वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए पूरे देश के विद्यार्थियों से अवसर प्रदान किया गया है।

अलग-अलग आयु वर्ग के छात्रों ने अतिरिक्त 3 डी-मुद्रित घटकों के साथ बालसा की लकड़ी या मॉडल फोम से बना लघु फॉमुर्ला 1 रेस कारों को तैयार और निर्मित किया था और सीओ 2 संकुचित गैस का इस्तेमाल करते हुए इनको दौड़ाया गया जो 25 मीटर की दूरी तय करती थी। बेहतरीन रेसिंग ट्रैक पर एफ 1 मिनी कार रेसिंग का उत्साह जबरदस्त अवसर था।

सिंह ने बताया, “इस तरह की कार बनाना और उन्हें प्रतियोगिता के तौर पर दशार्ने में बहुत मेहनत लगती है और बहुत सारे जटिल वायुगतिकी को ध्यान में रखना होता है; जो फॉमूर्ला 1 में भी आता है क्योंकि छात्रों को इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो असली फॉमूर्ला 1 टीम हैं। विद्यार्थियों ने अपनी साक्षरता, संख्यात्मकता, खेल और खेल विज्ञान, डिजाइन और प्रौद्योगिकी, कला और डिजाइन, वस्त्र ज्ञान, स्टेम सीखने, कंप्यूटिंग, और व्यवसाय और उद्यम को बेहतर बनाने वाले विषयों के साथ संलग्न हैं। नतीजतन, इस कार्यक्रम में छात्रों की वास्तविक उद्यमी कौशल विकसित होती है, जो अनिवार्यत: घंटे की जरुरत है।”

भारत का राष्ट्रीय विजेता 2018 में सिंगापुर में विश्व फाइनल में दुनिया भर से 44 अन्य टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। स्कूलों में फॉमूर्ला 1 का सीजन 2 सदस्य स्कूलों में फॉमूर्ला 1 क्लब के साथ प्रमुख होगा।