ये गल्तियां महज इत्तेफाक या अभी कोई और कहानी सामने आएगी ?

90
फाइल फोटो साभार

नई दिल्ली : मिथाली राज प्रकरण पर चुप्पी से लगने लगा है कि बीसीसीआई इस मामले को भूलकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। इसकी वजह भी है। दरअसल बोर्ड नहीं चाहता कि इस विवाद की कड़वाहट महिला टीम के प्रदर्शन को आगे भी प्रभावित करे। इसके लिए मिथाली और हरमन प्रीत को एक साथ बैठाकर मतभेद सुलझाने का प्रयास भी किया जा सकता है। कोच रोमेश पवार के लिए हरमन प्रीत और स्मृति मंधाना की पैरवी कितनी कारगर साबित होगी, जल्द ही इसका भी पता चल जाएगा।

बहरहाल चलिए उन कारणों को भी जान लेते हैं जिनकी वजह से अभी तक की सबसे सफल भारतीय महिला बल्लेबाज मिथाली राज अपने साथ हुए व्यवहार से आहत हो टी- 20 फाॅर्मेट को छोड़ने की तक सोचने लगी हैं।
टीम सूत्रों के अनुसार हरमन प्रीत क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में युवा खिलाड़ियों को ही देखना चाहती हैं। सीनियर खिलाड़ियों का फील्डिंग में शाॅर्प न होना इस विवाद की एक अहम वजह है। सूत्रों पर यकीन करें तो झूलन गोस्वामी को टी-20 से संन्यास भी हरमन प्रीत से अच्छी ट्यूनिंग न होने की वजह से लेना पड़ा था।

मिथाली और हरमन के संबंधों की तल्खी तब और बढ़ जाती है जब अलग-अलग फाॅर्मेट में ये दोनों कप्तानी कर रही होती हैं। हरमन के अलावा कोच रोमेश पवार और एक चयनकर्ता से मिथाली के खराब संबंधों ने विश्व कप के दौरान उनको सेमीफाइनल नहीं खेलने दिया। सूत्र बताते हैं कि वेस्टइंडीज में खेले गए टी-20 विश्व कप के दौरान सेमीफाइनल में इसी गठजोड़ ने एक दिन पहले फिट घोषित कर दिए जाने के बावजूद मिथाली को एकादश से बाहर रखा और भारतीय महिला क्रिकेट में अब तक का सबसे बड़ा विवाद खड़ा करवा दिया।

अब चलिए उन सवालों पर भी नजर डाल लेते हैं जो कोच, कप्तान और वहां मौजूद चयनकर्ता सुधा शाह की क्रिकेटीय समझ के साथ ही उनके फैसलों को संदेह के दायरे में खड़ा करते हैं। मसलन क्या सेमीफाइनल से पहले टीम के थिंक टैंक ने विपक्षी टीम के खिलाफ कोई रणनीति तैयार नहीं की थी ? इंग्लैण्ड के खिलाफ 21 रन देकर 4 विकेट का शानदार रिकॉर्ड रखने वाली स्पिनर एकता बिष्ट को एकादश में शामिल नहीं करने का सुझाव आखिर किसका था?
हेमलता जो पूरे टूर्नामेंट में बल्ले के साथ फ्लाॅप रही, उसको सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले में भी क्यों उतारा गया? और उसे स्टार ऑलराउंडर दीप्ती शर्मा से पहले क्यों भेजा जाता रहा? हेमलता के खाते में इस टूर्नामेंट में पांच मैचों के बाद कुल जमा 23 रन ही थे जो उसकी 15, 2, 4, 1 और 1 रन की पारी से आए थे। बेहतरीन ऑलराउंडर और मैच विनर दीप्ति शर्मा का ठीक तरह से क्यों इस्तेमाल नहीं किया गया?

इस विश्व कप में पूजा की इंजरी के चलते महाराष्ट्र की दाएं हाथ की लेग स्पिनर देविका वैद्या को क्यों टीम में शामिल किया गया? देविका की डिमांड आखिर किसने की थी, कप्तान ने या कोच ने? या फिर यह खिलाड़ी किसी सलेक्टर की खास पसंद थी? सवाल यह भी कि मीडियम पेसर का रिप्लेसमेंट स्पिनर के रूप में क्यों किया गया?
स्पिनर की ही जरूरत थी तो एकता बिष्ट और अनुजा पाटिल पहले से ही टीम में थीं, फिर क्यों एक और स्पिनर बुलाई गई? और जब एक और स्पिनर देविका को बुलाना बहुत जरूरी ही हो गया था तो फिर उसे खिलाया क्यों नहीं गया? क्या कुछ जिम्मेदारों ने एक खिलाड़ी को वेस्टइंडीज घुमाने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया?
क्या ये सवाल कप्तान, कोच और एक सलेक्टर को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी नहीं हैं?
एक गंभीर सवाल यह भी कि सेमीफाइनल में मजबूत इलेवन न चुनकर इंग्लैण्ड को जीत परोसने के लिए जो तमाम गल्तियां की गईं क्या वे महज इत्तेफाक थीं?

ये सवाल पूर्व कप्तान प्रमिला भट्ट के उस संदेह को भी मजबूत कर सकते हैं जिसमें उन्होंने सेमीफाइनल मैच फिक्स होने की आशंका जताई है। हालांकि यह बीसीसीआई और पुलिस की जांच का विषय है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here