मैच के दौरान इस खिलाड़ी और कोच को ट्रायल में शामिल होने की इजाजत किसने दी ?

259
साभार

कानपुर : कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में पुरुष ही नहीं बल्कि महिला टीम मैनेजमेंट भी अनुशासनहीनता में किसी से पीछे नहीं है। सूत्रों के मुताबिक यूपी टीम की कोच सूरत में खेले गए अंडर – 23 टूर्नामेंट से एक मैच के बीच ही प्लेइंग इलेवन की खिलाड़ी को लेकर रेलवे की चयन प्रक्रिया में शामिल होने प्रयागराज चली गई।

दरअसल यह कोच उस ट्रायल में सलेक्टर थी और साथ गई खिलाड़ी को ट्रायल देना था। इसके लिए कोच ने बैटिंग क्रम तक बदल डाला और क्षमा सिंह को ओपन करने भेज दिया। ऐसा इसलिए किया ताकि उसको जल्दी फ्री करके वह अपने साथ एनसीआर का ट्रायल दिलवाने ले जा सके। 24 मार्च को कर्नाटक के खिलाफ मुकाबले में टीम की कोच और यह खिलाड़ी गायब थी, जबकि पंजाब के खिलाफ क्षमा सिंह ने 50 रन भी बनाए थे। मैनेजर को कोच का दायित्व संभालना पड़ा। सवाल है कि क्या मैनेजर को कोच की भूमिका निभाने की परमीशन दी गई?

सवाल यह भी है कि मैच के दर्मियान ही इस महिला कोच को एनसीआर का ट्रायल लेने की इजाजत किसने दी? बता दें कि 22 मार्च को सूरत में यूपी और पंजाब की अंडर-23 महिला टीमों के बीच 50-50 ओवर का मुकाबला था। इस मैच में पंजाब ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 188 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए यूपी की टीम ने पांच विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। लेकिन इसी दौरान जबकि मैच चल रहा था लगभग ढाई बजे टीम की कोच अर्चना मिश्रा प्लेइंग इलेवन की खिलाड़ी क्षमा सिंह के साथ फ्लाइट पकड़ टीम को अकेला छोड़ प्रयागराज के लिए रवाना हो जाती हैं।

क्या इस कोच और खिलाड़ी ने यूपीसीए से ट्रायल में शामिल होने की इजाजत ली थी? यदि हां तो इजाजत देने वाला संघ का पदाधिकारी भी नियमों के उल्लंघन का दोषी है, क्योंकि एक ही दिन दो अलग-अलग संस्थाओं के लिए सर्विस देने की इजाजत न तो बीसीसीआई देता है और न ही रेलवे। पता चला है कि टूर्नामेंट से पूर्व जब एक खिलाड़ी ने एनसीआर ट्रायल में शामिल होने की परमीशन मांगी थी तो नियमों का हवाला देते हुए उसे स्पष्ट मना कर दिया गया था। यदि खिलाड़ियों की नौकरी या भविष्य का ही सवाल था तो जो और लड़कियां जाना चाहती थीं उन्हें क्यों नहीं जाने दिया गया। मैच में तो बेंच स्ट्रेंथ को भी आजमाया जा सकता था। अब यदि बीसीसीआई यूपीसीए से बीच मैच कोच और खिलाड़ी के ट्रायल देने जाने पर जवाब तलब करता है तो संघ क्या बताएगा? एक बार फिर साबित हो गया कि यूपीसीए में कुछ भी संभव है। Sportsleak को इस बारे में कोच और सीओओ का पक्ष नहीं मिल सका।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here