अश्लीलता के मामले में पहले भी कोई दूध के धुले नहीं रहे हैं भारतीय क्रिकेटर

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करण जौहर के चर्चित शो “कॉफी विद करण” में महिलाओं को लेकर फाउल टिप्पणी करने के मामले ने तूल पकड़ा। साथ ही हार्दिक पांड्या और केएल राहुल की शामत आ गई। बीसीसीआई ने इन दोनों क्रिकेटरों को सीरीज के बीच से ही आस्ट्रेलिया से वापस लौटाने का फरमान जाहिर किया है। हालांकि कहना चाहिए कि ये एक कड़ा फैसला है। इस पूरे विवाद में बीसीसीआई भी कम कसूरवार नहीं। जहां तक मुझे मालूम है बीसीसीआई हमेशा नए क्रिकेटरों को तौरतरीके सिखाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करता है, तो फिर ऐसा कैसे हुआ ? बीसीसीआई की कोशिश रहती है कि अपने हर क्रिकेटर को इस तरह तैयार करे कि वो मैदान से बाहर भी देश और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के जेंटलमैन ब्रांड एंबेसडर साबित हों। चूंकि हर क्रिकेटर को क्रिकेट खेलने के साथ मीडिया का सामना करना पड़ता है, लिहाजा बीसीसीआई आमतौर पर उन्हें बताता है कि उन्हें मीडिया में क्या बोलना चाहिए क्या नहीं। किस तरह का व्यवहार उनके लिए गरिमापूर्ण रहेगा। लिहाजा क्रिकेट बोर्ड को भी खुद को कठघरे में खड़ा करना चाहिए।

अब दूसरी बात..क्रिकेट को कवर करने वाले ज्यादातर पत्रकारों को अंदाज है कि हमारे क्रिकेटर ड्रेसिंग रूम में कैसी बातें करते हैं और किन बातों पर ठहाके लगते रहते हैं। इन ठहाकों में कप्तान, कोच औऱ मैनेजर भी शामिल हो जाते हैं। हालांकि ड्रेसिंग रूम की बातें प्राइवेसी के दायरे में आती हैं। लेकिन टीम इंडिया के मैचों को देश से लेकर विदेश तक कवर करने वाले कई खेल पत्रकार “ऑफ द रिकॉर्ड” बताते हैं कि अक्सर क्रिकेटर कैसी मस्तियां करते हैं। ये बातें बेशक बोर्ड के आला अधिकारियों की जानकारी में भी जरूर रहती हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के कई क्रिकेटर इस बात के लिए विख्यात रहे हैं कि वो ना केवल खुद और बल्कि साथी खिलाड़ियों को मस्ती कराने में उस्ताद रहे हैं, आज रवि शास्त्री टीम के कोच हों लेकिन कुछ साल पहले जब वो पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम के साथ कमेंटरी करते थे तो रसीले अंदाज में किसी ना किसी लड़की को लेकर “शेज एंड वेज” प्रोग्राम पेश करते थे, जो अक्सर अश्लीलता की हद तक पहुंच जाता था।

रवि शास्त्री जब 80 के दशक के आखिर में वेस्टइंडीज दौरे पर गए तो कोलकाता से प्रकाशित होने वाली एक स्पोर्ट्स पत्रिका “स्पोर्ट्स वर्ल्ड” में उनकी तस्वीरें प्रकाशित हुईं थीं कि वो स्विमिंग पूल में किस कदर मस्ती कर रहे हैं। उस मैगजीन ने चुटकी ली थी कि शास्त्री लड़कियों के साथ कुछ ज्यादा ही बिजी रहते हैं। उस जमाने में रवि शास्त्री को सबसे दिलफेंक क्रिकेटर माना जाता था। रवि शास्त्री ने 80 के दशक में दूरदर्शन पर इंटरव्यू के एक प्रोग्राम में अश्लील और दोहरे अर्थ की फिल्में बनाने वाले दादा कोंडके को फेवरिट फिल्मकार बताया था। सलीम दुर्रानी जब टीम के साथ होते थे, तो उनके होटल में कमरे में इतनी लड़कियां जाती थीं कि होटल के रिसेप्शन की आंखें फट जाती थीं। इंग्लैंड टीम के कप्तान टोनी ग्रेग ने इसे लेकर दुर्रानी के साथ मजाक भी किया था।

जिन दिनों आईपीएल शुरू हुआ, उन दिनों बीसीसीआई के एक अहम पदाधिकारी के बारे में कहा जाता है कि वो एक चीयरलीडर्स पर इस कदर फिदा थे कि उन्होंने उसे भारत बुलाने और लीग खत्म होने के बाद यहीं कुछ ज्यादा दिलचस्पी ली थी। कुछ चीयरलीडर्स ने ये शिकायतें भी की थीं कि रात की पार्टियों में भारतीय क्रिकेटरों का व्यवहार उनके साथ अशोभनीय हो जाता है। लिहाजा कहने की बात ये है कि भारतीय क्रिकेट टीम और बोर्ड दोनों अब तक ऐसे मामलों में लचीला रहा है। उन्हें दबाने में ज्यादा यकीन रखता आया है।
हां…बस एक ही अपवाद है, जिसने ऐसी ही एक घटना में दो क्रिकेटरों की ऐसी बली ली कि करीब उनका कॅरियर ही खत्म हो गया। 60 के दशक में होटल रिसेप्शनस्टि की शिकायत पर दो भारतीय क्रिकेटरों को पहले सस्पेंड किया गया फिर अनिश्चितकाल के लिए पाबंदी लगा दी गई।

ये घटना 1961-62 की है। इंग्लैंड टीम भारत आई हुई थी। दिल्ली में दूसरा टेस्ट खेला गया। इसी टेस्ट के दौरान ऐसा वाकया हो गया, जो कहने को कुछ भी नहीं था लेकिन उसने भारतीय क्रिकेट के दो प्रतिभाशाली क्रिकेटरों की बलि ले ली। भारतीय क्रिकेट बोर्ड चाहता तो इन दोनों क्रिकेटरों को हल्का दंड देकर छोड़ सकता था लेकिन उसने ऐसा रास्ता चुना, जिससे दोनों के कॅरियर ही खत्म हो गए।
ये दोनों क्रिकेटर थे सुभाष गुप्ते और कृपाल सिंह। गुप्ते उस समय केवल भारत ही नहीं दुनिया के बेहतरीन स्पिनर्स में गिने जाते थे। गैरी सोबर्स उन्हें बेहतरीन लेग स्पिनर कहते थे। उन्होंने 36 टेस्टों में 149 विकेट लिए थे। वह ऐसे बॉलर थे, जो एक पारी में नौ विकेट लेने का करिश्मा दिखा चुके थे। उस समय उनकी उम्र 32 साल थी। अब भी यही कहा जाता है कि वो महान स्पिनर शेन वार्न से कहीं ज्यादा अच्छे स्पिन गेंदबाज थे। वहीं कृपाल सिंह का परिवार तमिलनाडु का जाना माना क्रिकेट खिलाड़ियों का परिवार था।

दिल्ली टेस्ट में भारतीय टीम इंपीरियल होटल में ठहरी हुई थी। मैच खत्म होने के बाद कृपाल सिंह ने अपने कमरे से फोन करके होटल रिसेप्शनस्टि को शिफ्ट खत्म करने के बाद कमरे में ड्रिंक्स पर आने का ऑफर दिया। कृपाल के साथ कमरे में सुभाष गुप्ते भी ठहरे थे। रिसेप्शनस्टि को कृपाल का ये ऑफर अभद्र औऱ अश्लील किस्म का लगा। उसने फोन पर खरी खोटी सुनाई। फिर भारतीय टीम के मैनेजर से शिकायत कर दी।
टीम मैनेजर पॉली उमरीगर ने इस शिकायत को काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने इसके बारे में कप्तान नरीमन कांट्रैक्टर से चर्चा की। कांट्रैक्टर ने तुरंत गुप्ते को तलब किया। उनसे पूछा कि उनके कमरे में रहते ये घटना कैसे हो गई। गुप्ते का जवाब था, वो किसी को फोन करने से कैसे रोक सकते थे। लेकिन कांट्रैक्टर ने उनकी भूमिका पर नाराजगी जाहिर की।
इसके बाद कृपाल और सुभाष दोनों को टीम से बाहर कर दिया गया। फिर अनुशासनात्मक कमेटी ने दोनों क्रिकेटरों को बेमियादी समय के लिए सस्पेंड कर दिया। एक रिसेप्शनिस्ट से अशालीनता दोनों पर बहुत भारी पड़ी। हालांकि ये मामला भारतीय क्रिकेट में इस तरह का पहला और आखिरी मामला था।

(वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव की फेसबुकवाल से साभार )

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