शर्मनाक : ये तो बेशर्म हो चुके हैं, इनसे बड़े अपराधी तो वे जो अब भी चुप बैठे हैं !

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अंडर 19 महिला क्रिकेट टीम 2018

कानपुर : क्या चयनकर्ताओं और यूपीसीए पदाधिकारियों ने टीमों के चयन को धंधा बना लिया है? और क्या अब इस फलते फूलते बिजनेस में कुछ रसूखदार भी शामिल हो गए हैं ?
11 अक्टूबर को यूपी की टी-20 अंडर-19 महिला टीम घोषित होते ही यह तय हो गया कि चयनकर्ता और यूपीसीए पदाधिकारी बेहयाई पर उतर आए हैं। उन्हें न तो क्रिकेट की फिक्र है और न ही खिलाड़ियों के कॅरियर की।
सूत्रों पर यकीन करें तो बीसीसीआई से रजिस्ट्रेशन करवाए बिना ही एक खिलाड़ी को राजकोट की फ्लाइट पकड़ा दी गई। ये खिलाड़ी टूर के दौरान वह सारी सुविधाएं ले रही है जो मेहनत करके टीम में जगह बनाने वाली खिलाड़ियों को मिल रही है। यह बताने को कोई तैयार नहीं कि इस पर कैंप से लेकर टूर तक जो भारी भरकम खर्च आएगा, वह किसकी जेब से जाएगा? क्या सैकड़ों खिलाड़ियों से ट्रायल फीस के रूप में लिया जाने वाला पैसा टूरिस्ट खिलाड़ियों पर खर्च किया जा रहा है?
यूपी टीम में डंके की चोट पर इन दोनों सिफारिशी खिलाड़ियों को शामिल करने से यह साफ हो गया कि यूपीसीए सचिव युद्धवीर सिंह, महिला क्रिकेट कमेटी और सभी चयनकर्ता सभी इस गुनाह में बराबर के साझेदार हैं। टीम की स्टैंड बाई अर्चना सिंह, निशि कश्यप, सोनाली और आराधना सिंह वे बदकिस्मत खिलाड़ी रहीं, जिन्होंने पहले घोषित 20 खिलाड़ियों में तो जगह बनाई, लेकिन दो सिफारिशी खिलाड़ियों की एन्ट्री ने उनके लिए दरवाजे बंद करवा दिए।
बीसीसीआई ने अंडर-19 महिला क्रिकेट में पहली बार टी-20 टूर्नामेंट शुरू किया है।

गनीमत है कि यूपी का टूर्नामेंट में कमजोर टीमों के खिलाफ अभी तक का परफार्मेंस अच्छा है लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब मजबूत टीमों से सामना होगा। यूपी इस टूर्नामेंट को कैसे फिनिश करती है यह बाद की बात है। लेकिन जो खिलाड़ी 30 में भी नहीं थी उसे टीम के साथ घूमने भेजने से एक विवाद तो खड़ा हो ही गया है। सवाल उठ रहे हैं कि रजिस्ट्रेशन न होने के बावजूद एक खिलाड़ी को आखिर क्यों टूर करवाया जा रहा है और इससे यूपी क्रिकेट को क्या फायदा होने वाला है। इस बारे में चयनकर्ताओं से कोई जवाब नहीं मिल सका।
यूपीसीए सचिव सीनियर और एज ग्रुप पुरुष टीमों में भी मेरठ के कुछ कमजोर खिलाड़ियों यहां तक कि अपने ड्राइवर के पुत्र तक को जगह दिलाकर बदनाम हो चुके हैं। यूपीसीए निदेशक राजीव शुक्ला ने क्या यह जानने की कोशिश की कि सचिव बनाकर युद्धवीर पर उन्होंने जो भरोसा जताया था, उसका वह कहीं गलत फायदा तो नहीं उठा रहे ?

क्या यूपीसीए बन रहा है प्रतिभाओं का “कत्लगाह”?

यूपी की अंडर-19 टीम में जगह बनाने से वंचित एक खिलाड़ी के पिता ने कहा कि वे प्रतिभाओं के सपनों के कातिल हैं। हम जैसे मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार की बच्ची पढ़ाई को दांव पर लगा क्रिकेट में मुकाम तलाशने कड़ी मेहनत करती है। वर्षों सात से आठ घंटे अभ्यास के बाद वह डिस्ट्रिक्ट और मंडल क्वालिफाई कर यूपी का ट्रायल देती है। लेकिन उसके कॅरिअर की संभावनाओं का विस्तार एक ऐसी खिलाड़ी खत्म कर देती है जो खेल में उसके आसपास भी नहीं होती।
एक पिता के इस दर्द से पूरे प्रदेश के उन खिलाड़ियों की पीड़ा झलक रही है जो इस तकलीफ को झेल रहे हैं या झेल चुके हैं।

क्या राजीव शुक्ला विजय हजारे टीम और महिला अंडर-19 टी-20 टीम के चयन में हुई मनमानी की जांच करवाएंगे ? यदि नहीं, तो क्या मान लिया जाए कि यह सब उनकी जानकारी में चल रहा है? सबसे बड़े गुनहगार तो वे हैं जिन्होंने देश और प्रदेश के लिए अच्छा क्रिकेट खेला लेकिन अपने छोटे-छोटे हितों की खातिर अपना जमीर बेच दिया और आज तमाम गड़बड़ियों के बावजूद चुपचाप प्रतिभाओं को दम तोड़ते देख रहे हैं।

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