ठग्स ऑफ यूपी क्रिकेट : बनारस में ट्रायल से पहले ही सैकड़ों खिलाड़ियों का करा लिया गया था मेडिकल टेस्ट

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कानपुर : यूपी क्रिकेट में करप्सन उसकी जड़ों तक पहुंच गया है। बनारस में हुए क्रिकेट के डिस्ट्रिक्ट ट्रायल में नियमों के खिलाफ सभी खिलाड़ियों का मेडिकल करवाने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं ट्रायल के बाद चयनित 25 खिलाड़ियों का दोबारा मेडिकल करवाया गया। सूत्रों की मानें तो इस फ्राड को लेकर कुछ खिलाड़ियों के अभिभावक संबंधित एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी कर रहे हैं।

खिलाड़ियों ने आरोप लगाया है कि 2018-19 के सत्र के लिए हुए अंडर-14 और 16 के ट्रायल से पहले ही उनके डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन ने एक डाॅक्टर से मिलीभगत करके सभी खिलाड़ियों का मेडिकल टेस्ट करवा लाखों रुपये हजम कर लिये। इस ट्रायल के लिए हर खिलाड़ी से 400 रुपये मेडिकल और 300 रुपये रजिस्ट्रेशन फाॅर्म के लिए गए।
खिलाड़ियों के द्वारा बताए गए उनके फाॅर्म नम्बर को यदि सही माना जाए तो अंडर-14 में 1200 से ज्यादा और अंडर-16 में 1000 से अधिक खिलाड़ियों को फाॅर्म बांटे गए।

खिलाड़ियों का यह भी आरोप है कि उन्हें नहीं बताया गया कि ट्रायल से पहले मेडिकल होगा, इसलिए जो पैसे नहीं लाए थे उन्हें बिना ट्रायल दिये ही लौटना पड़ा, जबकि कई लड़कों को मेडिकल करवाने के लिए या तो किसी से पैसे मांगने पड़े या घर लौटकर पैसे का इंतजाम करना पड़ा। ट्रायल के बाद जब खिलाड़ी छांट लिए गए तो उनका दोबारा मेडिकल करवाया गया। यानि चयनित खिलाड़ी को 300 रुपये फाॅर्म और दो बार 400-400 रुपये मेडिकल समेत यह ट्रायल 1100 रुपये का पड़ा।

यही प्रक्रिया अंडर- 16 के ट्रायल में भी अपनाई गई। अब इन बच्चों के अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि यदि यूपीसीए ने ट्रायल से पूर्व मेडिकल करवाने का नियम बनाया है तो उसके बारे में पहले से क्यों नहीं बताया गया? जब इस बारे में sportsleak ने यूपीसीए के एक पदाधिकारी से बात की तो उसने ट्रायल से पहले सभी खिलाड़ियों का मेडिकल करवाने का नियम होने से इनकार किया। उसने नाम न खोलने की शर्त पर कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मसला है और इस मामले में संबंधित एसोसिएशन के खिलाफ जांच करवाकर कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस पदाधिकारी ने कहा कि क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए कई एसोसिएशन मेडिकल में खिलाड़ियों को डिस्काउंट तक दिलवाती हैं। लेकिन इस मामले में तो बच्चों से दो बार बेवजह पैसा खर्च करवाया गया है। इस पदाधिकारी ने बताया कि नियमतः ट्रायल के बाद अभ्यास मैचों के लिए बनने वाली टीमों के लिए चयनित खिलाड़ियों का ही मेडिकल करवाया जाता है। दोबारा मेडिकल तब करवाया जाता है जब जोन के लिए टीम सलेक्ट होती है।

बता दें कि इस शहर में अंडर-14 और 16 वर्ग में सैकड़ों खिलाड़ी तय तिथि पर जब ट्रायल देने पहुंचे तो संबंधित संघ के लोगों ने कहा कि पहले मेडिकल करवाया जाएगा, इसके बाद ट्रायल देने को मिलेगा। खिलाड़ियों के बयान को सच मानें तो सैकड़ों बच्चों से मेडिकल के 400 रुपये जमा करवा डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन ने लाखों रुपये जेब के अंदर कर लिए।
इस बारे में संबंधित क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव जावेद अख्तर ने एक अखबार से कहा कि हां हमने मेडिकल टेस्ट करवाया था। दरअसल हमें कई खिलाड़ी ओवर एज लगे तो हमने सभी का मेडिकल टेस्ट करवा लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीसीए में ट्रायल लेने से पहले सभी खिलाड़ियों का मेडिकल टेस्ट कराने का नियम है या नहीं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

Sportleak को इस बारे में कुछ खिलाड़ियों के बयान भी प्राप्त हुए हैं जिसमें उन्होंने ट्रायल से पहले ही मेडिकल करवाने की बात कही है। बता दें कि यह वीडियो ट्रायल के बाद तब रिकॉर्ड किया गया था जब खिलाड़ियों की सूची भी जारी नहीं की गई थी।

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