यदि यूपीसीए पदाधिकारियों की गलती साबित होती है तो केस की फीस कौन भरेगा ?

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कानपुर : हर तरह से सक्षम यूपीसीए के रसूखदारों को हराना आसान नहीं है। चंदौली क्राइम ब्रांच की टीम ने एक खिलाड़ी के जज पिता की एफआईआर पर दो बार यूपीसीए खंगालने की औपचारिकता तो जरूर निभाई। लेकिन जांच की खानापूरी से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि कूच बिहार ट्राॅफी की विजेता टीम के खिलाड़ी को इतनी आसानी से न्याय नहीं मिलने वाला।
यूपीसीए ने इस केस को मजबूती के साथ लड़ने का फैसला किया है। सूत्रों पर यकीन करें तो इसके लिए महंगे वकील खड़े करने की तैयारी है। ऐसे में खिलाड़ियों के मस्तिष्क में एक सवाल जरूर कुलबुला रहा होगा कि एक-एक सुनवाई के लिए लाखों रुपए की फीस आखिर किसके खाते से जाएगी ? यदि संघ पदाधिकारी, कोच व मैनैजर गलत साबित होते हैं और इनके खिलाफ फैसला आता है तो क्या आरोपियों के निजी एकाउंट से कोर्ट केस पर आने वाले खर्च की वसूली की जाएगी? क्योंकि तब यह सवाल जरूर उठेगा कि इन पदाधिकारियों द्वारा की गई गल्तियों का भुगतान खिलाड़ियों के पैसे से क्यों हो?
संघ में जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं वे भूमिगत हो गए हैं। इनमें से एक तो 20 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली अपने बेटे की शादी की तैयारियां भी चोरी छिपे ही कर पा रहा है। त्रिवेश को उसके हक का पैसा और प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए जज पिता के बैक ग्राउंड के बावजूद इतना संघर्ष करना पड़ रहा है तो जरा कल्पना कीजिए कि आम आदमी को कितना करना पड़ता होगा?

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यूपीसीए यदि पिछले एक दशक का ही रिकॉर्ड निकाल ले तो यह सच सामने आ जाएगा कि मैच फीस सबको बराबर-बराबर ही बंटती थी। तीन साल से बीसीसीआई ने पैसा नहीं भेजा तो इसमें खिलाड़ियों की गलती कहां से है। उनको संघ ने अपने जमा फंड से क्यों नहीं भुगतान कर दिया?

चर्चा है कि इन दिनों संघ के दो शीर्ष पदाधिकारियों के बीच सत्ता पर अपना वर्चस्व बरकरार रखने को संघर्ष चल रहा है। पूर्व सचिव स्व.ज्योति बाजपेई के पाले से पल्टी मारकर आया एक पदाधिकारी अब एक अन्य पूर्व सचिव की छाया से खुद को मुक्त करना चाह रहा है। इस अतिमहत्वाकांक्षी पदाधिकारी ने अपना कद बढ़ाने के लिए ग्रीनपार्क का पत्ता काटकर लखनऊ के अटल बिहारी बाजपेयी इकाना स्टेडियम को टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला दिलवा दिया। इसके लिए उसे दो विदेश दौरों के अलावा एक इम्पोर्टेड कार से भी उपकृत किए जाने की चर्चा रही। यह बात भी उड़ी की इसी मामले को लेकर दोनों बड़ों के बीच मनमुटाव हो गया, जिसका परिणाम यह निकला कि इकाना में कई खामियां निकलवाकर उसे बैन करवा दिया गया। हालांकि sportsleak इस तरह की किसी चर्चा की पुष्टि नहीं करती।

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