यूपीसीए सीओओ, सचिव व चैम्पियन अंडर-19 टीम के कोच व मैनेजर के खिलाफ एफआईआर

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कानपुर : उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) से एक खिलाड़ी के साथ विश्वासघात किए जाने की खबर है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक यूपीसीए सचिव और सीओओ समेत उसकी एक टीम के कोच और मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
अब मामला क्या है चलिए यह भी जान लेते हैं। अखबार के अनुसार यूपीसीए पदाधिकारियों पर अंडर-19 कूच बिहार ट्राॅफी की विजेता टीम के खिलाड़ी को गुपचुप तरीके से निकाल उसके हिस्से की अवार्ड मनी दबा लेने का आरोप लगाया गया है। यूपीसीए पदाधिकारियों के खिलाफ इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। जिला चंदौली में दर्ज एफआईआर में यूपी की अंडर-19 विजेता टीम के खिलाड़ी त्रिवेश यादव के पिता रमेश यादव ने थाने में तहरीर देते हुए आरोप लगाया है कि उसके पुत्र ने कूच बिहार ट्राॅफी के मैच खेले थे। यूपी इस टूर्नामेंट में चैम्पियन बनी थी। यूपीसीए ने विजेता टीम के लिए 20 लाख रुपये की अवार्ड राशि घोषित की है। इसके मुताबिक हर खिलाड़ी को 80 हजार रुपये की राशि दी जानी थी लेकिन यूपीसीए पदाधिकारियों ने उनके पुत्र त्रिवेश यादव को गुपचुप तरीके से टीम से बाहर कर उसके हिस्से की पुरस्कार राशि से उसे वंचित कर दिया।


अखबार के अनुसार इस बारे में संबंधित एसएचओ अभय सिंह का कहना है कि यूपीसीए के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ ), सचिव, अंडर-19 टीम के कोच और मैनेजर पर आपराधिक विश्वासघात, बेईमानी, गैरकानूनी तरीके से असली कागजात में हेरफेर कर फ्राड करने का आरोप लगा है।
यह संभवतः पहला मामला है जब अवार्ड मनी न देने पर यूपीसीए पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हुई है। दरअसल अपनों को मौका देने के लिए टीम के सदस्यों की संख्या बढ़ाने से भी अक्सर यह समस्या खड़ी होती है। महिला अंडर-19 टी-20 टीम के मामले में भी यूपीसीए के सामने यही दिक्कत खड़ी होने जा रही है। यूपी की यह टीम भी इस बार चैम्पियन बनी है लेकिन टीम में 18 खिलाड़ी रखी गईं थीं। नियमत: बोर्ड 15 सदस्यों की ही मैच फीस देता है। कोच, मैनेजर और फीजियो को फीस अब संघ ही देता है । लेकिन इस टीम में कोच, मैनेजर और फीजियो समेत 20 से ज्यादा सदस्य शामिल किए गए।

कूच बिहार ट्राॅफी के किस मैच में खेले त्रिवेश, क्यों नहीं बोर्ड भेज रहा है पैसा ?

यही समस्या सुपरलीग के सेमी फाइनल में खेलने वाली महिला टीम के साथ भी आएगी। इसमें सेमीफाइनल में एक खिलाड़ी तो ऐसी भी खेल गई जिसे चयनकर्ताओं ने सलेक्ट ही नहीं किया था। सूत्रों के मुताबिक इस खिलाड़ी को लखनऊ में रहने वाले यूपीसीए के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के इशारे पर टीम के साथ भेज दिया गया। यह खिलाड़ी किस साथी खिलाड़ी की मैच फीस हजम करेगी यह तो बाद में ही पता चलेगा।

सचिव ने आरोप नकारा
इस मामले में यूपीसीए सचिव युद्धवीर सिंह ने आरोप को नकारते हुए सवाल किया है कि जब बीसीसीआई से तीन वर्षों से कोई धनराशि आई ही नहीं तो गबन कैसा ? मंगलवार को हमें 30 दिन का नोटिस दिया गया और गुरुवार को पता चला कि एफआईआर कर दी गई है। हम पता कर रहे हैं कि त्रिवेश ने कितने मैच खेले हैं। इसके बाद हम जवाबी कार्यवाही करेंगे।

 

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